बस्ती-डुमरियागंज मार्ग का चौड़ीकरण: 150 करोड़ के प्रोजेक्ट में उड़ रही है जनता की सांसें
150 करोड़ का प्रोजेक्ट, लेकिन राहगीरों की जान जोखिम में: धूल और गिट्टियों से बदहाल बस्ती-डुमरियागंज मार्ग विकास के नाम पर 'विनाश': बस्ती-डुमरियागंज मार्ग पर 3600 पेड़ों की कटाई से छिनी राहगीरों की छांव
अजीत मिश्रा (खोजी)
विकास या विनाश: धूल और बदहाल सड़क के बीच दम तोड़ता बस्ती-डुमरियागंज मार्ग
- बस्ती-डुमरियागंज मार्ग: निर्माण कार्य में भारी लापरवाही, धूल और गिट्टियों से दोपहिया वाहन चालक बेहाल
- प्रशासन के दावों की खुली पोल: 150 करोड़ के सड़क निर्माण में बिजली के खंभों और ढीली कुटाई से अटकी सांसें
- सफर आसान बनाने की कवायद बनी मुसीबत: धूल से सराबोर बस्ती-डुमरियागंज मार्ग, जिम्मेदार मौन
बस्ती: विकास की चाह में जब प्रशासन लापरवाही की चादर ओढ़ लेता है, तो परिणाम आम जनता को धूल और जोखिम के रूप में भुगतना पड़ता है। बस्ती-डुमरियागंज मार्ग का चौड़ीकरण इसी ‘अंधेरगर्दी’ की जीती-जागती मिसाल बन चुका है। 150 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च करने के बाद भी, सड़क पर उड़ती धूल और फैली गिट्टियां राहगीरों की जान हलक में अटका रही हैं।बस्ती-डुमरियागंज मार्ग के चौड़ीकरण का कार्य इन दिनों गंभीर लापरवाही और अव्यवस्थाओं के घेरे में है। 150 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य तो सफर को आसान बनाना था, लेकिन वर्तमान स्थिति राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है।
लापरवाही की इंतहा: न पानी, न सफाई
सड़क निर्माण के दौरान गिट्टियों की कुटाई (रोलिंग) न करना और उन पर पानी का छिड़काव न करना कार्यदायी संस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है। स्थानीय लोगों और राहगीरों का कहना है कि धूल के गुबार के कारण दोपहिया वाहन चालक अक्सर असंतुलित होकर गिर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।सड़क निर्माण के दौरान बरती जा रही लापरवाही के कारण सड़क पर बिखरी हुई गिट्टियां और उन पर उड़ती धूल ने आवागमन को खतरनाक बना दिया है।
- सड़क निर्माण में नियमों की अनदेखी करते हुए गिट्टियों की सही ढंग से कुटाई (रोलिंग) नहीं की जा रही है।
- निर्माण कार्य के दौरान धूल को दबाने के लिए पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- सड़क पर बिछी गिट्टियों के कारण दोपहिया वाहन चालक अक्सर फिसल कर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
छांव छीनकर कैसा विकास?
एक तरफ प्रशासन सड़क चौड़ी करने का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ हजारों पेड़ों की बलि दी जा चुकी है। बिना छांव के, चिलचिलाती धूप में इस सड़क पर सफर करना आम जनता के लिए किसी सजा से कम नहीं है। जो हरियाली कभी राहगीरों को सुकून देती थी, वह आज विकास की भेंट चढ़ चुकी है।विकास के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा गया है, जिससे मार्ग पूरी तरह से खुला और चिलचिलाती धूप वाला हो गया है।
- सड़क चौड़ीकरण की जद में आए पेड़ों का सर्वे हो चुका है, और करीब 19 किलोमीटर की परिधि में पेड़ों की कटाई का कार्य चल रहा है।
- कुल मिलाकर 3600 पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है, जिससे वर्षों पुरानी हरियाली और राहगीरों को मिलने वाली छांव खत्म हो गई है।
अधिकारियों के आश्वासन, जमीन पर फिसड्डी
निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता का कहना है कि वे समय-समय पर पानी छिड़कने और कुटाई के निर्देश देते रहते हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। बिजली के खंभे अभी भी रास्ते में बाधा बने हुए हैं, जिसे हटाने का काम कछुआ चाल से चल रहा है।इस मामले पर निर्माण खंड, बस्ती के अधिशासी अभियंता का कहना है कि वे जूनियर इंजीनियर को समय-समय पर पानी छिड़कने और कुटाई के निर्देश देते रहते हैं, और भविष्य में लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
- बिजली के खंभों की समस्या: मार्ग चौड़ीकरण में बाधा बन रहे बिजली के खंभों को शिफ्ट करने का कार्य भी अत्यंत धीमी गति से चल रहा है, जिससे काम और अधिक बाधित हो रहा है।
- परियोजना का विस्तार: यह 50 किलोमीटर लंबा मार्ग बस्ती, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर और बहराईच जैसे छह जनपदों को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है।
आखिर 150 करोड़ का बजट क्या सिर्फ कागजों में सड़क बनाने के लिए है? जनता को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अधिकार कब मिलेगा? प्रशासन को जवाबदेह बनना ही होगा, वरना यह ‘विकास’ जनता के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते निर्माण कार्य में अनुशासन नहीं दिखाया, तो यह महत्वाकांक्षी परियोजना जन-सुविधा के बजाय जन-मुसीबत बनकर रह जाएगी।














